बांधवगढ़ के जंगलों का अदभूत सफर और उनसे ली गयी सीख

बांधवगढ़ के जंगलों के बारे में तो सब ने सुना होगा, मैंने भी सुना ही था। इसके बारे में विस्तार से जानना हो तो विकिपीडिया है ही। मैं तो बस यहाँ अपना अनुभव बाँटने आया हूँ। पढना जारी रखे

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पटना पोलिस का यातायात नियम आम जनता के लिए

आज गाड़ी लेने के बाद पहली बार मुझ पे धरा 177 लगा है पर ठीक है गलती भी मेरी ही थी। मैंने हेलमेट जो नही पहना था। पर मैंने बड़ा ही अजीब चीज देखा या यूँ कहे की मैंने ये पहली बार अपनी आँखों से देखा। सुना तो कई बार था, पर कभी देखा नही था। और कल मैंने एक और बात भी सीखी, जो मैं आप लोगो के साथ बाँटना चाहूंगा। अगर आप वो आम आदमी है जो किसी बड़े आदमी जैसे M.L.A, M.P., C.M., Police के रिश्तेदार या दोस्त नही है तो आप सरे यातायात नियम कानून का पालन करेंगे, नही तो आपका चालान काटा जायेगा या फिर ले दे की निपटाया जायेगा। पढना जारी रखे

शिक्षक दिवस : एक दिन हमारे शिक्षकों के नाम

आज 5 सितम्बर का दिन है और आज पूरा हिंदुस्तान इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मानता है। और ये बात लगभग सभी लोग जानते ही है की ये दिन हमारे डॉ. सर्वेपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। उनके बारे में अब मैं क्या कहूँ मैंने उन्हें कभी नहीं देखा और न ही मिला हूँ। पर आज मैं तो क्या हर कोई उनके बारे में जनता जरूर है और ये हुआ भी है तो सिर्फ हमारे शिक्षकों की वजह से ही।

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स्वतंत्रता दिवस की जलेबी और बारिश

14 अगस्त 2014 का दिन, यानी हिंदुस्तान के स्वतंत्रता दिवस के ठीक एक दिन पहले। मुझे उस रात सीतामढ़ि के लिए निकालना था। ऑफिस में तीन दिन की छुट्टी थी, 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी तो थी ही साथ में शनिवार और रविवार छुट्टी भी तो थी। मुझे घर गए हुए 3 महीने से ऊपर हो चुके थे।

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दार्जिलिंग यात्रा : एक अनोखा और रोमांचक सफर – अध्याय २

दार्जिलिंग, पहाड़ों पर बसा एक स्वर्ग जैसा सहर जहां की हवा में एक अनोखा और अद्भुत नशा सा था। मैंने ज्यादा पहाड़ या ज्यादा हिल स्टेशन नहीं देखे है बल्कि ये मेरा पहला अनुभव था पहाड़ों पर। चारों ओर हरियाली ही हरियाली थी। प्रकृति का ये अद्भुत नज़ारा मैं अपनी आंखों से देख रहा था। एक पल के लिए लगता था की ये सब एक सपना है और मैं कोई पुरानी फिल्म देख रहा हूँ जिसे पहाड़ों पर फ़िलमाया गया हो।

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फ्रेंड्शिप डे : यानी दोस्तों का दिन

फ्रेंड्शिप डे, एक ऐसा दिन जो पूरी तरह से दोस्तों को समर्पित है। इसका चलन दक्षिणी अमेरिका से शुरू हुआ और आज यह लगभग पूरे विश्व में अगस्त महीने के पहले इतवार को मनाया जाता है। हालांकि मुझे इस दिन में कोई खास दिलचस्पी नहीं है क्योंकि दोस्तों के लिए तो मेरा हर दिन ही एक फ्रेंड्शिप डे है। मैंने आज का ये दिन अपने एक दोस्त, चन्दन के साथ इको पार्क में मनाया।

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दार्जिलिंग यात्रा : एक अनोखा और रोमांचक सफर – भाग १

दार्जिलिंग एक ऐसा शहर जिसके बारे में मैंने सिर्फ पढ़ा या सुना ही था। दार्जिलिंग, जिसे पहाड़ों की रानी (The Queen of Hills) भी कहा जाता है। बंगाल की उत्तरी छोर पर लगभग 6500 ft. की ऊँचाई पर बसा ये शहर दुनिया भर में न सिर्फ चाय की खेती के लिए बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी मशहूर है।

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अँधेरा : उजाले के बाद की सच्चाई

आज दफ्तर में बड़ा ही अजीब सा माहौल था। हमारे एक साथी का जन्मदिन मनाया गया और वही दूसरे साथी की विदाई समारोह। मैं थोड़ा परेशान था, क्योंकि मैं यह तय ही नहीं कर पा रहा था की अपने उस साथी की विदाई पर मैं दुःखी होउ या फिर खुश। दुःख इस बात का था की अब हम साथ काम नहीं कर पाएंगे और खुशी इस बात की थी की वह अब अपने रास्ते पर आगे बढ़ चुका था। तरक्की और ऊँचाइयाँ उसका स्वागत करने के लिए बाहें फैलाई खड़ी हैं। भगवान करें वह जहां भी जाये तरक्की करें और सफलता हासिल करें और मुझे यकीन है वह करेगा।

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गंगा आरती: एक अनोखा अनुभव

कल का दिन कोई खास तो नहीं था, सिवाय इसके की कल मैंने एक भव्य गंगा आरती देखी और उसका हिस्सा बना। गंगा, हिमालय की गोद से निकाल कर बंगाल की खाड़ी में मिल जाने वाली ये लगभग 2500 km की ना सिर्फ एक नदी है बल्कि हिन्दू धर्म में एक खास जगह है इसकी। गंगा को हम पूजते है, नमस्कार करते है, और कितने शर्म की बात है की उसे मैला भी हम ही करते है। पढना जारी रखे