दार्जिलिंग यात्रा : एक अनोखा और रोमांचक सफर – भाग १

दार्जिलिंग एक ऐसा शहर जिसके बारे में मैंने सिर्फ पढ़ा या सुना ही था। दार्जिलिंग, जिसे पहाड़ों की रानी (The Queen of Hills) भी कहा जाता है। बंगाल की उत्तरी छोर पर लगभग 6500 ft. की ऊँचाई पर बसा ये शहर दुनिया भर में न सिर्फ चाय की खेती के लिए बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी मशहूर है।

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अँधेरा : उजाले के बाद की सच्चाई

आज दफ्तर में बड़ा ही अजीब सा माहौल था। हमारे एक साथी का जन्मदिन मनाया गया और वही दूसरे साथी की विदाई समारोह। मैं थोड़ा परेशान था, क्योंकि मैं यह तय ही नहीं कर पा रहा था की अपने उस साथी की विदाई पर मैं दुःखी होउ या फिर खुश। दुःख इस बात का था की अब हम साथ काम नहीं कर पाएंगे और खुशी इस बात की थी की वह अब अपने रास्ते पर आगे बढ़ चुका था। तरक्की और ऊँचाइयाँ उसका स्वागत करने के लिए बाहें फैलाई खड़ी हैं। भगवान करें वह जहां भी जाये तरक्की करें और सफलता हासिल करें और मुझे यकीन है वह करेगा।

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गंगा आरती: एक अनोखा अनुभव

कल का दिन कोई खास तो नहीं था, सिवाय इसके की कल मैंने एक भव्य गंगा आरती देखी और उसका हिस्सा बना। गंगा, हिमालय की गोद से निकाल कर बंगाल की खाड़ी में मिल जाने वाली ये लगभग 2500 km की ना सिर्फ एक नदी है बल्कि हिन्दू धर्म में एक खास जगह है इसकी। गंगा को हम पूजते है, नमस्कार करते है, और कितने शर्म की बात है की उसे मैला भी हम ही करते है। पढना जारी रखे